इस कदर रुसवा हुए हैं दोस्ती में हम तेरी

इस कदर रुसवा हुए हैं,
दोस्ती में हम तेरी
आईने में अक्स अपना
देखने से डर रहे हैं
बदनुमा सच्चाइयाँ जो
पाक रिश्तों से जुड़ीं
अपने ही क्यों, गैर भी
उसका खुलासा कर रहे हैं
एक मुद्दत से निभाते
आ रहे थे हम जिसे
उस वफ़ा के नाम ही
इलज़ाम सर पे धर रहे हैं
हावी हम पर यूँ हैं
नामालूम सी बेचैनियाँ -
उनकी प्यारी याद को भी
बेदखल हम कर रहे हैं
तुम कहो या न कहो
ये इल्म हमको है जरूर
हम तुम्हारी राह में
बस मील का पत्थर रहे हैं
Popularity: 16%
Author: Vinita Shukla
Website: http://vinitashukla.blogspot.com
मेरी प्रकाशित रचनाओं में अधिकतर कहानियां ही हैं, लेखों और कविताओं के माध्यम से भी अभिव्यक्ति को नए आयाम देना चाहती हूँ. इसके लिए ब्लोगिंग का मंच चुना है, सुधी पाठकों का सहयोग अपेक्षित है.
डी. ए. वी. पब्लिक स्कूल अनपरा तथा संत फ्रांसिस स्कूल अनपरा में लगभग ढाई वर्षों तक अध्यापन तथा 'अभिव्यक्ति' साहित्यिक संस्था, लखनऊ की सदस्य. प्रथम कथा संकलन के लिए उ. प्र. हिंदी संस्थान का पं. बद्री प्रसाद शिंगलू पुरस्कार, 'अभिव्यक्ति' के विविध संकलनों में रचनाओं का प्रकाशन, लखनऊ से निकलने वाली पत्रिकाओं 'नामांतर' एवं 'राष्ट्रधर्म ' तथा झांसी के दैनिक पत्र 'राष्ट्रबोध' में रचनाएं प्रकाशित. 'वनिता' एवं 'मेरी सहेली' में कहानियां प्रकाशित, 'मेरी सहेली' में छपी कहानी 'पराभव' हेतु सांत्वना पुरस्कार, द्वितीय कथा संकलन 'नागफनी' का लोकार्पण संपन्न (मार्च २०१०).
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बहुत अच्छी लगी कविता। मन के भाव सुन्दर शब्दों मे कहे हैं।
धन्यवाद निर्मलाजी.
बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है… अहसासों की गहराई बेहतरीन लगी..
हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया शाह नवाज़ जी.
बहुत अच्छी कविता।
उत्साह बढ़ाने के लिए आपका धन्यवाद.
रचना को सुधी पाठकों से रूबरू कराने के लिए धन्यवाद।
इस कदर रुसवा हुए हैं,
दोस्ती में हम तेरी
आईने में अक्स अपना
देखने से डर रहे हैं
विनीता जी बहुत उम्दा भाव नारी मन की व्यथा कथा आप की तूलिका माहिर है सब कुछ उकेर देने में -बिभिन्न मंच -पुस्तकों में आप के लेख व् रचनाएँ प्रकाशित देख -सुन बहुत हर्ष होता है , कृपया अपना सुझाव व् मार्ग दर्शन हमें भी दें -वैसे तो जनजागरण के मंच पर आप का स्नेह हमें मिलता ही रहता है -हम आप की रचनाएँ पढने के लिए लालायित हैं
आपके प्रोत्साहन के लिए बहुत धन्यवाद भ्रमर जी. इतना ही कह सकती हूँ कि जो कुछ लिखा जाये , दिल की गहराई में उतर कर और पूरी ईमानदारी के साथ लिखा जाये , तभी अभिव्यक्ति सफल होती है. शुभकामनाएं.
बहुत बढ़िया लिखा है आपने और ऐसा होता भी है…….
धन्यवाद रागिनी जी.
विनीता जी,
उत्तम रचना, लग रहा है की जैसे आप हमारे ही भाव वयक्त करने की कोशिश कर रहीं हैं
आपसे ये चार पंक्तियाँ उधार ले रहा हूँ, ये किसी के लिए मेरा सन्देश देने का काम करेंगी मेरे ब्लॉग में http://neeraj-dwivedi.blogspot.com . साभार
तुम कहो या न कहो
ये इल्म हमको है जरूर
हम तुम्हारी राह में
बस मील का पत्थर रहे हैं
आपका स्वागत है.
Others will likely be specified by totally different areas…
For instance, while some travelers would reasonably spend a more on a higher class of lodging, others would reasonably save money by staying at decrease priced inns or motels splurge on sightseeing or their food finances for the family….
another common question about writing posts…
While you don’t would like to deliberately ignore so many issues unspoken there is an art to publishing open-ended articles that makes enough space for your target audience becoming experts equally….
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लेखक / रचनाकार / प्रस्तुतकर्ता
मेरी प्रकाशित रचनाओं में अधिकतर कहानियां ही हैं, लेखों और कविताओं के माध्यम से भी अभिव्यक्ति को नए आयाम देना चाहती हूँ. इसके लिए ब्लोगिंग का मंच चुना है, सुधी पाठकों का सहयोग अपेक्षित है.
डी. ए. वी. पब्लिक स्कूल अनपरा तथा संत फ्रांसिस स्कूल अनपरा में लगभग ढाई वर्षों तक अध्यापन तथा 'अभिव्यक्ति' साहित्यिक संस्था, लखनऊ की सदस्य. प्रथम कथा संकलन के लिए उ. प्र. हिंदी संस्थान का पं. बद्री प्रसाद शिंगलू पुरस्कार, 'अभिव्यक्ति' के विविध संकलनों में रचनाओं का प्रकाशन, लखनऊ से निकलने वाली पत्रिकाओं 'नामांतर' एवं 'राष्ट्रधर्म ' तथा झांसी के दैनिक पत्र 'राष्ट्रबोध' में रचनाएं प्रकाशित. 'वनिता' एवं 'मेरी सहेली' में कहानियां प्रकाशित, 'मेरी सहेली' में छपी कहानी 'पराभव' हेतु सांत्वना पुरस्कार, द्वितीय कथा संकलन 'नागफनी' का लोकार्पण संपन्न (मार्च २०१०).
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