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इस कदर रुसवा हुए हैं दोस्ती में हम तेरी

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इस कदर रुसवा हुए हैं,
दोस्ती में हम तेरी
आईने में अक्स अपना
देखने से डर रहे हैं

 

बदनुमा सच्चाइयाँ जो
पाक रिश्तों से जुड़ीं
अपने ही क्यों, गैर भी
उसका खुलासा कर रहे हैं

 

एक मुद्दत से निभाते
आ रहे थे हम जिसे
उस वफ़ा के नाम ही 
इलज़ाम सर पे धर रहे हैं

 

हावी हम पर यूँ हैं
नामालूम सी बेचैनियाँ -
उनकी प्यारी याद को भी
बेदखल हम कर रहे हैं

 

तुम कहो या न कहो
ये इल्म हमको है जरूर
हम तुम्हारी राह में
बस मील का पत्थर रहे हैं

Popularity: 11%

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15 Comments »

  • nirmla.kapila said:

    बहुत अच्छी लगी कविता। मन के भाव सुन्दर शब्दों मे कहे हैं।

  • vinita shukla said:

    धन्यवाद निर्मलाजी.

  • Shah Nawaz said:

    बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है… अहसासों की गहराई बेहतरीन लगी..

  • vinita shukla said:

    हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया शाह नवाज़ जी.

  • M. Sajid said:

    बहुत अच्छी कविता।

  • vinita shukla said:

    उत्साह बढ़ाने के लिए आपका धन्यवाद.

  • Vinita Shukla said:

    रचना को सुधी पाठकों से रूबरू कराने के लिए धन्यवाद।

  • surendrashuklabhramar5 said:

    इस कदर रुसवा हुए हैं,
    दोस्ती में हम तेरी
    आईने में अक्स अपना
    देखने से डर रहे हैं
    विनीता जी बहुत उम्दा भाव नारी मन की व्यथा कथा आप की तूलिका माहिर है सब कुछ उकेर देने में -बिभिन्न मंच -पुस्तकों में आप के लेख व् रचनाएँ प्रकाशित देख -सुन बहुत हर्ष होता है , कृपया अपना सुझाव व् मार्ग दर्शन हमें भी दें -वैसे तो जनजागरण के मंच पर आप का स्नेह हमें मिलता ही रहता है -हम आप की रचनाएँ पढने के लिए लालायित हैं

  • vinita shukla said:

    आपके प्रोत्साहन के लिए बहुत धन्यवाद भ्रमर जी. इतना ही कह सकती हूँ कि जो कुछ लिखा जाये , दिल की गहराई में उतर कर और पूरी ईमानदारी के साथ लिखा जाये , तभी अभिव्यक्ति सफल होती है. शुभकामनाएं.

  • ragini said:

    बहुत बढ़िया लिखा है आपने और ऐसा होता भी है…….

  • vinita shukla said:

    धन्यवाद रागिनी जी.

  • Neeraj said:

    विनीता जी,
    उत्तम रचना, लग रहा है की जैसे आप हमारे ही भाव वयक्त करने की कोशिश कर रहीं हैं
    आपसे ये चार पंक्तियाँ उधार ले रहा हूँ, ये किसी के लिए मेरा सन्देश देने का काम करेंगी मेरे ब्लॉग में http://neeraj-dwivedi.blogspot.com . साभार

    तुम कहो या न कहो
    ये इल्म हमको है जरूर
    हम तुम्हारी राह में
    बस मील का पत्थर रहे हैं

  • Vinita Shukla said:

    आपका स्वागत है.

  • control flota gps said:

    Others will likely be specified by totally different areas…

    For instance, while some travelers would reasonably spend a more on a higher class of lodging, others would reasonably save money by staying at decrease priced inns or motels splurge on sightseeing or their food finances for the family….

  • business cards said:

    another common question about writing posts…

    While you don’t would like to deliberately ignore so many issues unspoken there is an art to publishing open-ended articles that makes enough space for your target audience becoming experts equally….

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